जोधपुर। राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (RIFF) के 12वें संस्करण के तहत रविवार को आयोजित मास्टर क्लास कार्यक्रम में भारतीय सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता रजित कपूर ने अभिनय की तैयारी, किरदारों की समझ और युवा कलाकारों के लिए जरूरी अनुशासन पर विस्तार से चर्चा की ।
RIFF के फाउंडर व फेस्टिवल डायरेक्टर अंशु हर्ष के साथ हुए संवाद में रजित कपूर ने कहा कि अभिनय के लिए कोई तय नियम या फिक्स्ड फॉर्मूला नहीं होता। हर किरदार की शुरुआत एक स्टार्टिंग पॉइंट से होती है और उनके लिए यह शुरुआती बिंदु लगभग 90 प्रतिशत मामलों में स्क्रिप्ट और कहानी होती है। स्क्रिप्ट ही वह बीज है, जिससे किरदार जन्म लेता है। हालांकि कुछ अपवादों में निर्देशक का विज़न भी एक्टर के लिए शुरुआती आधार बन सकता है। उन्होंने बताया कि एक अभिनेता को निर्देशक की भावनाओं से ज्यादा उसके विज़न को समझना चाहिए। अभिनेता एक तरह से कठपुतली होता है, जिसे स्क्रिप्ट और निर्देशक के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है,उन्होंने कहा रजित कपूर ने अभिनय की तुलना गीली मिट्टी से करते हुए कहा कि एक्टर को हमेशा लचीला रहना चाहिए। अगर मिट्टी सूख गई, तो न उसमें बदलाव संभव है और न ही विकास अपने चर्चित और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘मेकिंग ऑफ महात्मा’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चुनौती ही किसी भी कलाकार को आगे बढ़ाती है
रजित कपूर ने बताया कि अगर कोई किरदार बहुत आसान लगे, तो मुझे उसमें दिलचस्पी नहीं होती। लेकिन जब लगता है कि यह मुश्किल है और मैं खुद से सवाल करता हूं कि इसे कैसे निभाऊंगा, तभी मैं उस किरदार को चुनता हूं,।
उन्होंने कहा युवा और बच्चों के लिए खास संदेश देते हुए रजित कपूर ने कहा कि अगर अभिनेता बनना है, तो उसमें पागलपन की हद तक जुनून होना चाहिए. उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने पूरे अभिनय करियर में कभी भी किरदार निभाते समय मोबाइल फोन को अपने पास नहीं रखा, क्योंकि यह एकाग्रता को तोड़ता है।
कार्यक्रम में RIFF फाउंडर अंशु हर्ष ने कहा कि ऐसे संवाद युवाओं को न केवल सिनेमा की बारीकियां सिखाते हैं, बल्कि उन्हें जीवन में अनुशासन और समर्पण का महत्व भी समझाते हैं।


